Wednesday, 22 April 2015

बनवास ........

खुशनुमा बगिया से मुझको
आज मिला बनवास है
क्या ख़बर अब मुझको यारो
किस को किस की प्यास है
जिंदगी में ढूंडता हर कोई
ख़वाब की सौगात है
उसको जो भी अब मिले
मुझको तो काटना बनवास है
इश्क़ में होता यही है
हर कोई यहाँ उदास है
जो नहीं मिलता जहाँ में
क्यों उसी के लिये दिल उदास है !!
                                      ........मोहन सेठी 'इंतज़ार'