Friday, 30 January 2015

तुम से है ........


तू ख़ुदा की इबादत में हो तो हो
मेरी हर इबादत तो तुम से है
दौलत-ऐ-हुस्न ये जो तेरा है
मेरी फ़कीरी तो बस उस से है
तेरी मुस्कुराहटों से जो फूल झरते हैं
मेरी ख़ुशी की महक तो बस उनसे है
दुनियाँ में हजारों और हसीं हों तो हों
मेरी मुहोब्बत तो सिर्फ़ तुम से है
तेरी नित नई अदायें जो देखता हूँ
मेरी जीने की चाहत तो उनसे है
देखो... चाँद की चांदनी हो तो हो
मेरी फ़िज़ायें तो रोशन तुम से हैं
तेरी रेशमी जुल्फ लेहराएँ तो
मेरी बदली की चाहत तो उनसे है
पतंग की उड़ान हवा से हो तो हो
मेरे एहसासों की उड़ान तो तुम से है
समन्दर की लहरें हों तो हों
मेरी उमंगों की तरंग तो तुम से है
तेरी पाजेब कुछ यूँ बजती हैं
मेरी संगीत की चाहत तो उनसे है
तेरी चुनरिया जब लहराती है
मेरी पुरवाई की चाहत तो उससे है
तेरी पलकें जब नम होती हैं
मेरी उदासी का समंदर भरता उनसे है
लाख और सितम ज़िंदगी के हों तो हों
मेरे ग़म और हर ख़ुशी तो बस तुम से हैं
और फिर ये..... दुनियाँ हो ना हो
मेरी दुनियाँ तो तुम से है .......
                                                 ........मोहन सेठी 'इंतज़ार'