Wednesday, 6 May 2015

जय विजय मई 2015 में "खिलौना" ....



मुझ से अच्छा तो वो खिलौना होगा
रुलाया जब भी किसी ने
गले तूने फिर उसे ही लगाया होगा !

मैं तेरा कुछ ना सही
बस वो खिलौना होता !
कभी गोद में सोया होता
कभी आग़ोश में खोया होता !
खेल के चाहे बेदर्दी से
तूने तोड़ दिया होता !
ऊब कर बेशक हमसे
रुख मोड़ लिया होता !
एक टूटा खिलौना ही सही.....
कुछ लम्हें जिन्दगी के
तेरे साथ तो जी लिया होता !!
                             ........मोहन सेठी 'इंतज़ार'