Monday, 30 March 2015

धंधा ........


' खिड़की '  तक आओ
मेरी पीठ भी थपथपाओ
मैंने भी इन्टरनेट पर
नयी दुकान सजाई है
कुछ सैंपल चख़ कर तो जाओ !

बेशक "साधारण" ही लिखते जाओ
चलो अपना नाम भी न बताओ
बेनाम टिप्पणी करते जाओ
मुझे मेरे सामान का बयां मिलेगा
अच्छा नहीं है तो कुछ नया खिलेगा
दूकानदार हूँ.... जो चलता है वोही मिलेगा !

आना जरुर इंतजार रहेगा
नये दोस्त बनाने का दौर चलेगा
नहीं चली दूकान
तो ' क्लोजिंग डाउन ' की तख्ती लगा
सेल का ऐलान करूँगा
धंधा बदल कर कुछ नया करूँगा !

                     .....मोहन सेठी 'इंतज़ार'