खिड़की
आवाज़ तो तेरे दिल की हूँ ..... सुर बदल बदल के आ जाता हूँ ........इंतज़ार
Sunday, 31 January 2016
मेरा इश्क़ ........
ये सुहानी चाँदनी
मेरा इश्क़ है
मैं इसे आग़ोश में ले
सपनों में खो जाता हूँ
इसकी रुहानी महक
इसकी शीतलता
और मुझे अपने में
भिगो देने की अदा
बेहद अच्छी लगती है
मेरे हिस्से की चांदनी तो मेरी है
अब ... चाँद किसका है
ये चाँद जाने ...........
.........इंतज़ार
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